Education India

‘मिर्चें’

‘मिर्चें’
____

मिर्चें झाड़ से गुच्छे में
फूट पड़ती हैं आड़ी टेड़ी
कैसी भी हरी झक
लेकिन जब ये सूख जाती हैं
बिन खाद पानी और हवा के
तब ये अकड़ पड़ती है
लाल होकर
अपने तेवर के साथ
एक एक बीज
आग उगलने लगता है जिव्हा पर
और धधक पड़ता है
शरीर की रग रग में
इंकलाब बनकर
लोकतंत्र के स्वाद जैसा।।

– हीरालाल राजस्थानी

फेसबुक वाल से