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मथुरा में कटरा टीला बौद्धबिहार की भूमि है, श्रीकृष्ण जन्म स्थान नही

बौद्ध नगरी मथुरा को लोला दैत्य ने बसाया था। मथुरा बौद्ध धर्म का केन्द्र रहा है तथा मथुरा कुषाणकालीन साइड होने के कारण बौद्धिष्ट परिपथ बनना चाहिए । मथुरा अनेकों राजाओं की राजधानी भी रही है ।और मथुरा पर नागबंशियों का भी शासन रहा है और कुषाणों का300वर्षों तक क्षत्रप महाक्षत्रप कट फाइसिस राजा रहे है। राजा सूरसेन का भी राज्य रहा है।मथुरा को षौडास जनपद के नाम से जाना जाता है। मथुरा में बौद्ध धर्म व बौद्ध संस्कृति से सम्बन्धित पुरातत्व महत्व के अति प्राचीनतम ऐतिहासिक स्थल/कोशमीनार/संघाराम स्मारक/टीले भारतीय पुरातत्व बिभाग द्वारा संरक्षित हैं।मथुरा जनपद में जिनकी संख्या लगभग 40बतायी गयी है जो कि पुरातत्व अधिनियम प्रिजिर्वेशन मॉन्युमेंट एक्ट के अन्तर्गत 100मीटर+संशोधित200मीटर तक निर्माणकार्य प्रतिबन्धित है ये एक्ट1904में बना था।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण बिभाग दिल्ली के इशारे पर मनुवादियों ने लगभग 80प्रतिशत स्थल/स्मारक/कोशमीनार/संघाराम/स्तूपों पर अबैध कब्जे करवाकर अबैधनिर्माण कर लिये गये हैं।तथाकथित श्रीकृष्ण जन्म स्थान ट्रष्ट ने सम्पूर्ण टीले पर अबैध निर्माण कर लिया गया है।जो नकली कृष्ण मन्दिर है उक्त टीले पर मुस्लिम व हिन्दुओं मे सन् 1968में मुकदमा चला था।लेकिन भारतीय बौद्धों को पक्षकार नहीं बनाया गया था,आपस में दोनों ने बटवारा कर लिया था। जो टीला बौद्धबिहार की भूमि है।अब तथाकथित कृष्ण जन्म स्थान पर दुबारा केश खुलेगा।बिशेष जानकारी के लिए ,मथुरा में कटरा टीला बौद्धबिहार की भूमि है, श्रीकृष्ण जन्म स्थान नही? नामक पुस्तक को पढे l — मानसिंह बौध्द मथुरा द्वारा।