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लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया ने ब्राह्मणों को शासक वर्ग का दर्ज प्रदान किया और क्षत्रिय वर्ण पीछे हो गया. पीछे ही नही द्वितीय स्थान से तीसरे पायदान पर खिसक गया.

1947 से पहले ब्राह्मण देवता के आशीर्वाद से क्षत्रिय कौम शासक वर्ग थे,

लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया ने ब्राह्मणों को शासक वर्ग का दर्ज प्रदान किया और क्षत्रिय वर्ण पीछे हो गया. पीछे ही नही द्वितीय स्थान से तीसरे पायदान पर खिसक गया.

ब्राह्मण देवता के आशीर्वाद से मारवाड़ी बनिया और जैनियों को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ, नेहरू राज से लेकर मोदी राज ने भरपूर बैंक लोन ज़मीन और कई सरकारी सुविधा उपलब्ध कराकर मारवाड़ियों को आर्थिक रूप से सबसे धनी कौम बना दिया !

इसी कौम का छोटा सा प्याला हैं लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला. उनका कहना है ब्राह्मण समाज सबसे श्रेष्ठ है उन्हें ये स्थान त्याग और तपस्या के चलते प्राप्त हुआ और येही वजह है ब्राह्मण समाज हमेशा मार्गदर्शक की भूमिका में रहा है ?.

मैं ओम बिरला से सहमत नहीं हूँ.
इस देश सिर्फ एक श्रेष्ठ समाज है वो है आदिवासी समाज. मैं आदिवासी नही हूँ लेकिन इस श्रेष्ठ समाज का मैं रिणी हूँ कर्ज़दार हूँ, इस समाज ने इस भूमि पर सबसे पहले आकर अपने त्याग और परिश्रम रहने योग्य जीने योग्य बनाया !

पेड़ पत्तों फल को पहचाना कौन से विषैले हैं कौन सा खाने योग्य है, इस काम लिए कई जाने गई. जानवरों को पालतू पशु बनाया उनकी आदतों का अध्ययन किया. पक्षियों की भाषा को सबसे प्रथम पहचान कर हमें अवगत करवाया. इलाज के लिए जंगलों में पहाड़ों में जड़ी बूटी खोजी दवा का आविष्कार किया.

मकान कपड़े धनुष बाण और कृषि औज़ार को बनाया. भूमि को चीरकर अन्न पैदा किया. संगीत यंत्र बनाकर संगीत को विकसित किया !

आर्य ब्राह्मणों कभी कोई श्रम या उत्पादन नही किया मानव जाति के कल्याण और सभ्यता के विकास को बढ़ाने वाली किसी चीज़ का आविष्कार नही किया, आज के बाद कोई मत कहना ब्राह्मण श्रेष्ठ है.

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Kranti Kumar