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आदिवासियों के #रूढ़िगत_कानून/#कस्टमरी_लॉऔर भारत का #संविधान

फेसबुक लाइव (FB Live): आदिवासियों के #रूढ़िगत_कानून/#कस्टमरी_लॉऔर भारत का #संविधान

आज मैंने निम्न पोस्ट के साथ आप सबको लाइव चर्चा में शामिल होने के लिये आमंत्रित किया है। आप सबका दिल से स्वागत है। उचित समझें तो कृपया लाइव चर्चा को शेयर करते रहें। आप सब से विनम्र निवेदन कृपया कुछ मिनट मुझे सुनें और फिर समय रहा तो कुछ सवाल भी शामिल किये जायेंगे। यद्यपि जिन मित्रों ने अग्रिम निवेदन के बाद भी जिन्होंने जिज्ञासाएं लिखी नहीं, उनकी जिज्ञासाओं को शामिल करना व्यावहारिक दृष्टि से मुश्किल होगा। कृपया किसी #अन्य या #असंगत_विषय_पर_सवाल_पूछकर #विमर्श_में_बाधक_नहीं_बनें

आदिवासियों के #रूढ़िगत_कानून/#कस्टमरी_लॉ और भारत का #संविधान

भारत के आदिवासियों के मध्य वर्तमान में #रूढिगत_कानून यानी #कस्टमरी_लॉ को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। यह चर्चा दक्षिणी राजस्थान के रास्ते राजस्थान में प्रवेश कर चुकी है। देशभर में रूढिगत कानून के बहाने भोले आदिवासियों को अपने साथ जुटाया जा रहा है। भोले लोगों की भीड़ को समर्थन मानकर उत्तरी-पूर्वी राजस्थान के कुछ बद्धिजीवी भी इस विमर्श की सच, संवैधानिक तथा आदिवासी नेतृत्व का चमत्कार मानकर आगे बढा रहे हैं। जबकि संविधान की दृष्टि में रूढिगत कानून और भीड़ का क्या सम्बन्ध है? इसे समझने की जरूरत है!

कुछ लोग सोचते हैं कि जिसके साथ भीड़ होती है, वही आदिवासियों का सबसे बड़ा शुभचिंतक और आदिवासी हितों के लिये लड़ने वाला सबसे बड़ा लड़ाका यानी #जननेता है?

यदि ऐसा है तो राजस्थान में #डॉक्टर_किरोड़ी_लाल_मीणा_जी के होते हुए अन्य किसी आदिवासी नेता या समाज सुधारक की जरूरत ही नहीं होनी चाहिये? फिर तो अकेले डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा जी ही आदिवासियों के #सबसे_बड़े_शुभचिंतक और #रक्षक हैं? जिसका प्रमाण उन्होंने सम्पूर्ण राजस्थान के सभी आदिवासी समुदायों को एक मंच पर लाकर खड़ा करने में सफलता हासिल की है।

ऐसे में कम से कम राजस्थान में किसी दूसरे आदिवासी नायक की क्या जरूरत होनी चाहिये? फिर भी राजस्थानभर में हजारों दूसरे लोग लगातार आदिवासी हितों के लिये सक्रिय हैं! क्या इसका मतलब अकेले डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा जी सब कुछ नहीं है?

इन हालातों में #भीखाभाई_भील और डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की #आदिवासियतके प्रति सोच में क्या अंतर या क्या भेद है? इसे समझना होगा।

जेल में बंद झारखंड के #विजय_कुजूर एवं उनके साथियों की पथरगढी के रूप में आदिवासियों को लेकर जो रणनीति थी, वह कितनी सही तथा सफल रही है?

इसी भांति #कटाषणा सूरत गुजरात से में बैठे कुछ आदिवासी महानायक, कटाषणा से बाहर निकले बिना केन्द्र की भारत सरकार को गैर-कानूनी बताकर आदिवासी युवाओं को अपने साथ जोड़ने वालों की नीति क्या है? इस नीति के साथ इन्होंने क्या हासिल किया है और क्या हासिल किया जा सकता है? इन सब बातों पर खुलकर स्वस्थ विमर्श किये बिना आदिवासी समुदाय उजाले की ओर कदम नहीं बढा सकता!

इसी प्रकार से देशभर में विभिन्न नामों के सामाजिक संगठनों द्वारा आदिवासी को #जल#जमीन#जंगल के नाम पर आंदोलन खड़े करने हेतु खड़ा करने वालों का इतिहास क्या रहा और वर्तमान क्या है? इस बात को भी समझना होगा!

यह भी समझना होगा कि ऐसे लोग कितने मुखौटे पहनते और बदलते रहते हैं? जो कालान्तर में सांसद-विधायक बनकर आदिवासी हितों के प्रति चुप्पी साध लेते हैं! क्या संसद और विधानसभा में पहुंचना ही इनका अंतिम लक्ष्य होता है। दु:ख ऐसे कथित नायक संसद और विधानसभा में जाकर कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस के हाथों बिकते रहते हैं!

मैंने देखा है कि #समाज_सुधारक बनकर पहले तो आदिवासियों को बतलाते हैं कि डॉ. अम्बेडकर का नाम तक नहीं लेना चाहिये। मगर जैसे ही राजनीति के मैदान में उतरते हैं, अम्बेड़कर में आस्था रखने वालों के वोट की खातिर अम्बेडकर को आदिवासियों के सिर पर बिठा लेते हैं! ऐसे लोग आदिवासी समुदायों तथा अम्बेडकर की विचारधारा के कितने हितैषी तथा शुभचिंतक हो सकते हैं? अब तो आदिवासी को गुमराह करने हेतु उत्तर-दक्षिण या पूरब-पश्चिम में बांट देना चाहते हैं।

ऐसे लोग सुनी-सुनाई और आधारहीन बातों को भोले आदिवासियों के सामने ठीक उसी अंदाज में पेश करते हैं, जैसे #ब्राह्मण_भागवत_कथा_का_वाचन_करता है या कोई #मनुविरोधी_हिंदुत्व_का_विरोध_करता है।

चिंता की बात तो यह है कि आखिर इन बातों से आदिवासियों को हासिल क्या होने वाला है? आदिवासी को गुमराह करके मिल क्या जायेगा? संसद और विधानसभा में पहुंचना ही लक्ष्य है तो फिर आदिवासियों को क्यों दाव पर लगाया जा रहा है?

इन हालातों में हमारी पीढियां बर्बाद हो जायेंगी! मुझे समझ नहीं आता, हम इस तरह भोले आदिवासी समुदाय को कब तक यों ही बर्बाद करते रहेंगे? अत: हमारा फर्ज होना चाहिये झूठ, फरेब और अंधभक्ति से बचना और आदिवासियों को हर हाल में बचाना होगा।

#आदिवासी_ताऊ_डॉ.#पुरुषोत्तम_लाल_मीणा
नेशनल कन्वीनर: इंडीजीनश ट्राईबल फ्रंट (ITF)
9875066111, 01.09.2019, जयपुर, राज.

 

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Samta Awaz

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