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निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पूजा वर्मा द्वारा हासिल की गई इस जीत ने इस अनुभव को और भी ज्यादा सुखद बना दिया है। पूजा वर्मा को बधाई एवं भविष्य के लिए शुभकामनाएं।

राजस्थान विश्वविद्यालय से अध्यक्ष पद पर पहली बार किसी छात्रा की जीत, वो भी एक दलित छात्रा का जीत हासिल करना बहुत ही सुखद है।निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पूजा वर्मा द्वारा हासिल की गई इस जीत ने इस अनुभव को और भी ज्यादा सुखद बना दिया है। पूजा वर्मा को बधाई एवं भविष्य के लिए शुभकामनाएं।

इस जीत में वैसे तो न्याय पसंद सभी जाति वर्गों के लोग शामिल है। लेकिन आदिवासी वर्ग की तरफ से मिले एक तरफा समर्थन के बिना यह जीत संभव नही थी। पिछली बार भी आदिवासी वर्ग ने दलित आदिवासी एकता निभाते हुए निर्दलीय खड़े हुए एक दलित छात्र को ही जितवा कर भेजा था। यह बात अलग बाद में उसने NSUI जॉइन कर लिया, अब दलित वर्ग के छात्रों की जिम्मेदारी है कि अगली बार आदिवासी समाज के किसी छात्र को अध्यक्ष बना कर भेजें।

बाक़ी लोग तो अब तक जीतते ही रहे है। उनका बाद में देखेंगे।

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Samta Awaz

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