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अर्थशास्त्र मे मनमोहन सिंह , रघुराज रमन के कद का आज की तारीख मे कोई अर्थशास्त्री भारत मे है तो वो है ,डॉ नरेंद्र जाधव

अर्थशास्त्र मे मनमोहन सिंह , रघुराज रमन के कद का आज की तारीख मे कोई अर्थशास्त्री भारत मे है तो वो है ,डॉ नरेंद्र जाधव।

महाराष्ट्र नासिक के अत्यंत गरीब बौद्ध परिवार मे जन्मे नरेंद्र जाधव बचपन से कुशाग्रबुद्धि के थे। बचपन से ही जातिवाद के असहनीय चटके वो सह चुके थे।

बाबासाहेब आंबेडकर के अमुल्य संदेश – चलो शहर की ओर को जीवन मे आत्मसात करते हुए मेट्रीक के बाद वो बडे भाई के पास मुंबई चले गए। अगर गाव मे रह जाते तो शायद आज भी खेत में मजदूरी कर रहे होते।

वहा से ग्रेज्युशन, बाद मे विदेश के विश्वविख्यात युनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र मे उच्च शिक्षा ग्रहण की। अर्थशास्त्र मे उनके लिखे पेपर बेजोड़ और बेमिसाल थे।

80 के दशक मे विदेश मे लाखो की नौकरी के पैकेज को ठुकराकर भारत वापस आए और रिजर्व बैंक को ज्वाईन किया। जल्द ही वो उस वक्त के रिजर्व बैंक के गवर्नर मनमोहन सिंह के टीम के अहम सदस्य बन गए।

बाबासाहेब आंबेडकर ने देशभक्ती और राष्ट्रवाद की जो लाईन खीची थी। उसी का अनुसरण उन्होने किया। वो भी भुखमरी ,आपातकाल के उस दौर में विदेश छोड़कर देशसेवा करने की प्रेरणा, उन्हें बाबासाहेब से मिली।

30 साल रिजर्व बैंक मे नौकरी करने के बाद वो 2006 मे वहा से रिटायर हुए और पुणे युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बनाए गए। यहा भी उन्होने अपना एक मॉडेल लागु किया जो विधार्थियो के लिए हितकरी था।

मनमोहन सिंह अब भारत के प्रधानमंत्री बन चुके थे। उन्होने नरेंद्र जाधव को मोंटेक सिंह अहुलवालिया की तरह योजना आयोग का सदस्य बनाया । बाद मे 2016 मे भाजपा ने उन्हें राज्यसभा का मनोनीत सांसद बनाया।

मनमोहन सिंह विद्वान थे, वो सही टैलेंट का उपयोग करना जानते थे। विदेश मे पढा रहे रघुराज रमन को उन्होने भारत बुलाया और रिजर्व बैंक की कमान सौपी । मोदी सरकार इस मामले में फिसड्डी साबित हुई।

आज के इस मुश्किल हालात मे, मंदी के माहौल मे, भाजपा के पास एक विश्वविख्यात अर्थशास्त्री है। पर पता नहीं क्यो , इस तुरूप के इक्के को वितमंत्री बनाकर भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास नही कर रही है।

( फोटो मे बाबासाहेब पर लिखी अपनी पुस्तकें प्रधानमंत्री मोदीजी को भेट करते हुए !

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Samta Awaz

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