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यह महामंडलेश्वर है तो अब यह अपने को दलित क्यों कह रहा है?

यह महामंडलेश्वर है तो अब यह अपने को दलित क्यों कह रहा है?

अगर दलित है तो महामंडलेश्वर कैसे हुआ? क्या संविधान में ऐसा कोई प्रावधान है कि दलित को महामंडलेश्वर बनाया जाए? क्या धर्म की जो व्यवस्था है उसमें यह परिवर्तन करना चाहता है? एक बात इसको समझ लेना चाहिए कि वह व्यवस्था ब्राह्मणों ने अपने फायदे के लिए बनाई है। अगर अपना व समाज का भला करना है तो उस व्यवस्था से बाहर निकलना पड़ेगा।
बाबा साहब ने इस पर चिंतन किया था और निष्कर्ष निकाला था कि उस व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता है। उस व्यवस्था से बाहर निकलना ही सही रास्ता है। आगे बाबा साहब ने अपनी पुस्तक ‘जातिभेद का बीजनाश’ में लिखा है:-
“रामायण की कथा में राम द्वारा शंबूक का वध करना इस बात को साबित करता है। राम राज्य चातुर्यवर्ण्य व्यवस्था पर आधारित था। राजा होने के नाते राम इस व्यवस्था को पालन करने के लिए बाध्य थे। इसलिए शंबूक का वध करना राम का कर्तव्य था क्योंकि जिसे शूद्र शंबूक अपनी जाति की सीमाओं को लांग कर ब्राह्मण बनना चाहता था। यही कारण था कि राम ने शंबूक का वध किया था।”