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सच की परत तक ! सफर हमारी ऐतिहासिक विरासत का…..

सच की परत तक !
सफर हमारी ऐतिहासिक विरासत का…..
पहली शताब्दी के यह दो स्तूप दो अलग-अलग स्थानों की खुदाई पर मिले हैं दोनों स्थलों की आपसी दूरी लगभग 50 से 60 किलोमीटर होगी ! एक हिडम्बा हिल्स के मनसर माइन्स के घने जंगलों के बीच पुरातत्त्व द्वारा उत्खनन में निकले दूसरा गोंदिया से लगभग 17 किलो मीटर पर एक गांव के टीले पर निकला ज़हां पर भैरव नाथ का मंदिर स्थापित कर पूजा पाठ कर स्तूप पर घिस कर त्रिपुंड खींचकर बगल में त्रिशूल गाड़ दिया ! पुरातत्त्व विभाग ने जब खुदाई की तो मंदिर को सड़क किनारे कर दिया ! ज़हां लेखक मैं स्वय खड़ा हूं वह शिवलिंग स्वरूप गढ़ दिया बगल में त्रिशूल जबकि इस गोल स्तूप के नीचे चौकोर शिलापट्ट है जो किसी अरह्त भिक्खुओं के निर्वाण पर अर्थात निधन उपरांत श्रध्दावश बनवाया जाता है !
यहां विदित हो कि शिवलिंग यौनि से निकलता हुआ गोल लिंगाकार आकृति लिए होता है ! यह सब षड्यंत्र पूर्वक बौध्दो के सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्थलों को मिटाने के लिए साजिशन किया जा रहा है ! दोनों स्थल पर समान चैत्य है ! एक को शिवलिंग बना बगल मे त्रिशूल गाड़ दिया !
यह बौध्दों की सांस्कृतिक व धार्मिक ऐतिहासिक विरासत के साथ खुल्लमखुल्ला धार्मिक असमाजिक तत्वों द्वारा खुला खेल खेला जा रहा है ! अगली बार फिर किसी और स्थल की जानकारी लेकर आपके बीच आऊंगा !
स्थापत्य कला की दृष्टि से दोनों चैत्य स्तुपो में समानता है फिर शिवलिंग कैसे बना दिया ?
यही विचारणीय प्रश्न है आप सबके बीच !
विशेष: चित्र 1 और 4 एक स्थल के है और 2 और 3 दूसरे स्थल के है पर दोनों में ऐतिहासिक समानता है !
क्रमशः जारी………

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Samta Awaz

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