Crime India

जाति है कि जाती नहीं- “तुम्हारा काम शौचालयों की गंदगी साफ करना है,पढ़-लिखकर क्या डीएम बन जाओगी?”- कक्षा 4 की दलित छात्रा मोहनी से शिक्षिका संध्या शर्मा ने कहा….

जाति है कि जाती नहीं-
“तुम्हारा काम शौचालयों की गंदगी साफ करना है,पढ़-लिखकर क्या डीएम बन जाओगी?”- कक्षा 4 की दलित छात्रा मोहनी से शिक्षिका संध्या शर्मा ने कहा….
###########################$
कपड़ा बिलकुल नीट एंड क्लीन है,चेहरा व बाल शैम्पू व सुगन्धित साबुन से धुला गमक रहा है,पैरों में पड़े चप्पल-जूते पालिश होने के बाद सीसे की तरह चमक रहे हैं पर मन-मस्तिष्क जाति की गंदगी से बदबू कर रहे है।बड़ा अजीब है यह जाति जो धर्म,शिक्षा,समाज,सम्प्रदाय आदि सबको मात दे रहा है क्योकि यही हमारे संस्कार में है या यही हमारे धर्म,शिक्षा,समाज व सम्प्रदाय का असल स्वरूप है।इस जाति के नाते ही हम हजारो वर्ष गुलाम रहे हैं पर उसका भी असर नही है क्योकि यह जाति मानव मन को निर्लज्ज बना दिये हुये है।
कितना गजब है कि कक्षा 4 की बच्ची मोहनी जिसे अभी ठीक से अपनी जाति और इस जाति का मतलब भी मालूम न होगा उसे यह जाति पूरी नृशंसता के साथ अपमानित कर रही है।
जाति से अनुसूचित(sc) होने के नाते मोहनी को क्लासरूम से बाहर शिक्षिका संध्या शर्मा बैठने को मजबूर करती है।वह कहती है कि “तुम्हारा काम शौचालयों की गंदगी साफ करना है, पढ़-लिखकर क्या डीएम बन जाओगी?
बरेली के नबाबगंज तहसील के अभयराजपुर गांव के प्राइमरी स्कूल के राजेश पाल (अनुसूचित जाति) की बेटी मोहनी(कक्षा-4) को अनुसूचित जाति का होने के नाते शिक्षिका संध्या शर्मा द्वारा उसे अलग बैठाने, मुर्गा बनाकर यह कहने कि पढ़-लिखकर क्या डीएम जाओगी,मिड डे मील अलग बैठाकर खिलाने आदि का आरोप है जो वाकई शर्मनाक व सोचनीय है।
कितना शर्मनाक है यह मंजर व सोच जिसमे कक्षा-4 की बच्ची को उसके जाति के नाते किसी और द्वारा नही बल्कि उसके गुरु द्वारा टारगेट किया जाता है।उस बच्ची की मार-पिटाई होती है,मुर्गा बना दिया जाता है क्योकि वह जाति से अभिजात्य नही है।शिक्षिका संध्या शर्मा के अंदर जाति की बू सड़ांध की सीमा पर है जो बाल मन को बार-बार चोटिल कर रही है।गजब है यह जाति व इस जाति को बनाने वाला क्योकि यह जाति है कि जाती नहीं।
-चंद्रभूषण सिंह यादव
प्रधान संपादक-“यादव शक्ति”/कंट्रीब्यूटिंग एडिटर-“सोशलिस्ट फ़ैक्टर”