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गरीबों के मसीहा भालचंद यादव जी नही रहे….नमन…

गरीबों के मसीहा भालचंद यादव जी नही रहे….नमन…
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पूर्वांचल की धरती पर भालचंद यादव के रूप में एक ऐसे नेता का सूर्योदय हुवा जो गरीब,मजदूर,संतकबीर नगर की आम जनता, पिछड़े,दलित एवं अल्पसंख्यक का ऐसा न हितरक्षक बन कर उभरे कि वे सांसद रहे न रहे लोग उन्हें सांसद जी ही कह कर पुकारते रहे।अब वह शानदार नेता भालचंद यादव जी हमारे बीच नही हैं क्योकि मेदांता में उनके जीवन का सूर्यास्त हो गया है।पूरा पूर्वांचल गमगीन है भालचंद जी के निधन से क्योकि वे भीड़ के नेता थे,आम जन के सांसद थे और अपने क्षेत्र के नवनिर्माता थे।
भालचंद यादव जी का चमकदार उदय उस समय हुवा जब देवशरण सिंह यादव जी बस्ती का डीएम बनकर आये थे।उस वक्त मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जी ने अपना वरदहस्त भालचंद यादव जी पर यूँ प्रदान कर दिया था जैसे कोई उनका अपना सगा हो।
भालचंद यादव जी का गठीला बदन, रौबदार चेहरा,खूबसूरत पर्सनालिटी और मिलनसार,हँसमुख स्वभाव उन्हें एक सफल नेता बनाने में खूब सहायक हुवा।मुलायम सिंह यादव जी का सानिध्य,देवशरण सिंह यादव जी का भरपूर सहयोग और अपना आकर्षक व्यक्तित्व भालचन्द यादव जी को बहुत ही जल्द एक सफल व लोकप्रिय नेता बना दिया।वे पहली बार ही सांसद चुनाव जीत गए थे लेकिन उन्हें जबरन हरा दिया गया।इस चुनाव के बाद भालचंद यादव जी जब दुबारा लड़े तो भारी बहुमत से जीत हासिल कर सांसद बन अपने क्षेत्र के विकास को समर्पित हो गए।भालचन्द यादव जी अपने क्षेत्र के विकास हेतु अपनी निधि तो लगाते ही थे दूसरे राज्यसभा सदस्यों की भी निधि जुगाड़ कर लेते थे।भालचंद यादव जी अपने क्षेत्र व समर्थकों के लिए एक अभिभावक की तरह थे जो उनके प्रत्येक सुख-दुख में सहकार रहता था।
भालचंद यादव जी जैसा मुक्तहस्त व्यक्ति मैंने राजनीति में नही देखा।राजनीति में लोग पद पा संचय करने लगते हैं पर भालचंद यादव जी दिल्ली से घर तक खुले हाथ गरीबों में पैसा बांटते रहते थे।उनके लिए लोग महत्वपूर्ण थे न कि अर्थ।कोई जरूरतमंद भालचंद यादव जी के दर से बिना कुछ पाए वापस नही लौट सकता था,यह उनका स्वभाव था।
भालचंद यादव जी भीड़ के नेता थे।वे जहां रहे भीड़ वहीं रही क्योकि उन्होंने जन मन मे अपना ऐसा समर्पित व्यक्तित्व बना लिया था जो किसी के निकालने से अब निकलने वाला नही था।भालचंद यादव जी के क्षेत्र के हरेक गांव में उनके चाहने वाले व्यक्तिगत लोग थे जो किसी दल के नही बल्कि उनके अपने थे क्योकि वे भी उनके अपने थे।
भालचंद यादव जी के निधन की खबर ने उनके चाहने वालों को मर्माहत कर दिया है।पूरे पूर्वांचल में भालचन्द यादव जी जैसा अब कोई और नेता नही दिख रहा है जो उनके सरीखा मुक्तहस्त गरीबों का मददगार हो।हम दुखी हैं उनके निधन से और अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
-चंद्रभूषण सिंह यादव
प्रधान संपादक-“यादव शक्ति”/कंट्रीब्यूटिंग एडिटर-“सोशलिस्ट फ़ैक्टर”