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काश कि इन जाति-बिरादरी के लोग अपने-अपने जातियों के जातिवादी स्वभाव के कारणों से भी गलती से भी इन महापुरुषों को पढ़ लें तो भी बहुत बड़ा सामाजिक, आर्थिक और ‘क्रांतिकारी परिवर्तन’ आज भी देश में सम्भव है… जय भीम जय भारत.. सुशील पासी पोस्ट

काश कि इन जाति-बिरादरी के लोग अपने-अपने जातियों के जातिवादी स्वभाव के कारणों से भी गलती से भी इन महापुरुषों को पढ़ लें तो भी बहुत बड़ा सामाजिक, आर्थिक और ‘क्रांतिकारी परिवर्तन’ आज भी देश में सम्भव है…

जय भीम जय भारत.. सुशील पासी पोस्ट

 

“रामसुमझ पासी” जी को यदि [पासी] बिरादरी ठीक से पढ़ ले एवं जान ले,

“ललई सिंह यादव” को यदि अहीर [ यादव ] बिरादरी ठीक से पढ़ ले एवं जान ले,

“डॉ राम स्वरूप वर्मा” को कुर्मी [ पटेल ] बिरादरी ठीक से पढ़ ले एवं जान ले,

“महराज सिंह भारती” को जाट [ जट्ट ] बिरादरी ठीक से पढ़ ले एवं जान ले ,

“जगदेव प्रसाद कुशवाहा या महतो, मौर्य” को कोइरी [ कुशवाहा ] बिरादरी ठीक से पढ़ ले एवं जान ले

“पेरियार” को गड़ेरिया [ पाल ] बिरादरी ठीक से पढ़ ले एवं जान लें,

ज्योति राव फूले को माली[ सैनी ] पढ़ लें,

बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर को [ SC+ST+OBC ] ठीक से पढ़ लें और

कार्ल मार्क्स को [ आदिवासी ] को पढ़ा दिया जाय ……

तो समझो भारत का हर एक क्षेत्र में बेहतरीन परिणाम मिलने से कोई ‘माई का लाल’ नहीं रोक सकता है चाहे कोई ‘अवतार’ लेकर भी भारत में क्यूँ ना उतर जाए